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ससुराल में देवर से चुदवाकर चूत की खुजली मिटाई

मेरा नाम निशा है और मैं एक 30 साल की शादीशुदा औरत हूँ और अपने ससुराल वालो के साथ बिलासपुर के पास एक गाँव है रतनपुर जो शहर से 15 किलोमीटर दूर है अपने परिवार के साथ रहती हूँ. मेरे घर में मेरे सास ससुर, मेरे पति, मेरे देवर और मेरी 3 साल की बेटी रहते है.मेरी शादी आज से 5 साल पहले राजेश से हुई थी जो बिलासपुर में एक मेडिकल एजेंसी में मेनेजर है और उनकी सैलरी भी अच्छी है, जिससे हमें कोई परेशानी नहीं होती. मेरे ससुर स्कूल में टीचर थे और 3 साल पहले बहुत जल्दी जल्दी तबियत ख़राब होने के कारण रिटायरमेंट ले लिए और अब घर में खेती बाड़ी का काम देखते है.

और मेरे देवर रवि जो अभी गुरुघासीदास यूनिवर्सिटी में एम.ए कर रहे है, उनकी उम्र लगभग 26 साल है और अभी उनकी शादी नहीं हुई है वो बिलासपुर में रहते है और घर के पास होने के कारण घर आटे जाते रहते है.
अब आपको ज्यादा बोर नहीं करुँगी, तो बात आज से 8 महीने पहले की है, जनवरी का महिना था और अच्छी ठण्ड पड़ रही थी.आप ये कहानी हिंदी सेक्स की कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मेरी लाइफ नार्मल चल रही थी, मैं आपको बता दूँ एक आकर्षक महिला हूँ जिसकी चूचियां बड़ी बड़ी है और गांड भी मस्त उठी हुई है, और मैंने ये भी नोटिस किया है की जब मैं कही जाती हूँ तो लोग मेरी चुचियों और गांड को घूरते है.मैं अपने पति की चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट थी, क्योंकि उनका लंड काफी मोटा और लम्बा था, लगभग 6.5 इंच का होगा. वो मुझे चूब चोदते थे और मैं भी मजे लेकर चुदवाती थी.तभी अचानक मेरे पति को 15 दिनों के लिए ऑफिस के काम से मुंबई जाना पड़ा और वो चले गए. अब उन्हें गए 2-3 दिन हो गए थे और मेरी तड़प बढ़ने लगी जैसे तैसे मैं अपने बूब्स को मसल कर और चूत में उंगली डालकर अपनी तड़प को शांत कर लेती लेकिन जिसे लंड से चुदवाने की आदत हो उसे उंगली कैसे संतुष्ट कर सकती है. ऐसा ही चलता रहा और 10 दिन बित गए.
फिर उसी दिन मेरे देवर घर आये थे और वो शाम को वापस जाने वाले थे तभी खबर मिली की मेरे पति के मामा जो की कई दिन से बीमार थे उनका स्वर्गवास हो गया है और मेरी सास और ससुर को वहां जाना जरुरी है, तो उन्होंने रवि को घर पर ही रुकने को कहा और वो लोग रायपुर चले गए.आप ये कहानी हिंदी सेक्स की कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मेरी मेरे देवर से अच्छी बनती है और हमलोग हँसी मजाक करते रहते है. उस दिन रात हो गयी और हम खाना खाकर सो गए.लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी क्योंकि मैं तो चुदने के लिए तड़प रही थी. फिर कब मुझे नींद आ गयी मुझे पता ही नहीं चला.

फिर अगले दिन सुबह जब में बाथरूम गयी तो देखा मेरे देवर नहा रहे है और बाथरूम का दरवाजा बंद करना भूल गए है, तभी गलती से मेरी नजर उनके बड़े से काले लंड पर पड़ी जो झूल रहा था उसे देखकर मैं शर्मा गयी और किचन में आ गयी.फिर मेरे देवर नाश्ता करके बिलासपुर चले गए और कहा की वो शाम को आ जायेंगे और चले गए. और मैं पुरे दिन उनके लंड के बारे में सोचती रही, क्योंकि वो लंड काफी बड़ा और मोटा था और मैं भी बहुत दिनों से चुदी नहीं थी, शाम को रवि घर आ गया और रात का खाना खाने के बाद हम बाते करने लगे.आप ये कहानी हिंदी सेक्स की कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। तभी मैंने कहा की अब सोना चाहिए काफी रात हो चुकी है, लगभग 11 बजे होंगे.तभी रवि ने कहा की भाभी एक और कम्बल चाहिए रात को काफी ठण्ड लग रही थी.तो मैंने कहा की अलमारी के ऊपर से निकालना पड़ेगा जो मेरे बेडरूम में रखा था.तो उन्होंने कहा ठीक है और मेरे बेडरूम में आ गए लेकिन उनका हाथ नहीं पहुँच रहा था, कम्बल काफी ऊपर था.तो उन्होंने कहा की मैं चेयर लेकर आता हूँ जो हॉल में था.तो मैंने कहा की उसकी जरुरत नहीं है आप मुझे उठाओ मैं निकालती हूँ.उन्होंने कहा ठीक है और उन्होंने मेरी जन्घो को दोनों हाथ से पकड़ा और मुझे उठा लिया और मेरी चूत बिलकुल उनके मुह के पास थी और मैं बिलकुल गरम हो गयी और अपने चूत को उनके चेहरे पर रगड़ने लगी, मुझे नहीं पता चल पा रहा था की मैं क्या कर रही थी शायद मैं चुदाना चाहती थी और उन्हें लगा की मैं कम्बल निकाल रही हूँ.फिर मैंने कम्बल निकल लिया और रवि अपने कमरे में जाने लगे तो मैंने कहा की रवि यही पर सो जाइये, मुझे घबराहट होती है, कोई घर पर भी नहीं है.

उन्होंने कहा ठीक है और हम मेरे बेड पर सोने लगे, मैंने साडी पहनी हुई थी तो मैंने उसे नहीं उतारा और मैं वैसे ही सोने लगी मेरी बेटी सो चुकी थी उसका अलग बेड था जो उसी कमरे में था.अब रवि ने दूसरा कम्बल ओढ़ लिया, उन्होंने एक लोअर और बनियान पहन राखी थी, और मैंने दूसरा कम्बल ओढ़ लिया और लाइट ऑफ कर दी और नाईट लैंप चालू कर दिया जिससे हलकी हलकी रौशनी रूम में थी.अब रात के 12 बज चुके थे, मेरे देवर सो चुके थे पर मुझे नींद नहीं आ रही थी, अब मैंने अपनी साड़ी उतार दी, क्योंकि उसे पहन कर सोना अजीब लग रहा था, अब मैं सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी. तभी मुझे लगा की अब मैं बिना चुद्वाए नहीं रह पाऊँगी, क्योंकि मेरे बगल में एक मर्द सो रहा था जो मेरी आग बुझा सकता था.अब मैंने देखा की रवि मेरी तरफ करवट लेकर सो रहा है तभी मैंने अपनी कम्बल हटा दी और पेटीकोट को घुटनों के ऊपर तक सरका दिया और अपनी गांड को पीछे उछल कर रवि के लंड के पास ले गयी, अब मुझे कैसे भी रवि को जगाना था.
तभी मैंने धीरे से रवि की कम्बल हटा कर नीचे फेंक दी और खुद सोने का नाटक करने लगी. तभी मैंने देखा की मेरे नीचे कुछ हलचल हो रही है मतलब रवि की नींद ठण्ड की वजह से खुल चुकी थी.आप ये कहानी हिंदी सेक्स की कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर थोड़ी देर बाद मैंने फिर अपनी गांड कोपिछे बढाया तो मैंने महसूस किया की रवि का लंड खड़ा है और मैं सोने के नाटक करने लगी.फिर थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया की मेरी जन्घो को रवि अपने हाथ से सहला रहा है और मेरी गर्मी और बढ़ने लगी.मुझे ऐसा लग रहा था की मैं जन्नत पहुँचने वाली हूँ, मेरा मन कर रहा था की मैं अभी रवि को अपनी बाहों में जकड लूँ लेकिन मैंने काबू रखा.
अब रवि ने धीरे से मेरे पेट पर अपना हाथ रख दिया और सहलाने लगा फिर उसने धीरे से मुझे सीधा किया और मैं सीधी लेट गयी और सोने का नाटक करती रही फिर रवि ने मेरी ब्लाउज के बटन खोल दिए और ब्रा का हुक तो मैंने पहले ही खोल दिया था, अब रवि मेरे बूब्स के साथ खेलने लगा, अब उसने मेरी पेटीकोट का नाडा खोल दिया और अपने हाथ से मेरी चूत को पेंटी के ऊपर से ही सहलाने लगा अब मुझे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था और मेरी सिसकी निकल गयी.

पर रवि ने ध्यान नहीं दिया, अब उसने मेरी पेटीकोट को सरकाकर निकाल दिया और मेरी पेंटी भी निकल दी, अब वो मेरे बूब्स को चूमने लगा और मेरी आह निकल गयी और उसे लगा की मैं जाग गयी हूँ, पर उसने अपना काम जारी रखा.तभी मैंने अपने हाथ उसके बालो में फसाया और कहा रवि ये क्या कर रहे है.तो वो बोला भाभी आपकी मद मस्त जवानी का थोडा सा मजा ले रहा हूँ और मेरी सिसिकारियां भी निकल रही थी, रवि जनता था की में चुदवाने के लिए तड़प रही हूँ. फिर मैंने कहा की रवि जनता था की मैं चुदवाने के लिए तड़प रही हूँ, फिर मैंने कहा मत करो रवि मैं तुम्हारी भाभी हूँ.आप ये कहानी हिंदी सेक्स की कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
तो रवि ने कहा ये मेरे लंड की आग है भाभी बुझा लेने लीजिये और देवर ने मेरी चूत में अपनी जीभ डाल दी और चाटने लगा.अब मैं पूरा साथ देने लगी और गांड उठा उठा कर उसके मुह में चूत को पेलने लगी और उसके सर को पकड़कर अपने चूत में डालने लगी और मुह से आवाज निकलने लगी अह्ह्ह्ह… अह्ह्ह्ह,… ओह्ह्ह…तभी मैंने कहा रवि अब मत तड़पाओ जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डालो नहीं तो मैं मर जाउंगी, तभी रवि ने कहा रुक जाओ मेरी जान इतनी जल्दी भी क्या है और अपना लंड मेरे मुह में डाल दिया उसका लंड बहुत मोटा था और लालबाग 7 इंच लम्बा में उसे चूसने लगी.मुझे बहुत मजा आ रहा था मैंने देखा की उसका लंड बिलकुल रोड बन गया है अब वो मुझे पूरा नंगा कर दिया और खुद भी हो गया उसके गठीले बदन को देखकर मेरी आग और बढ़ गयी अब.. वो मुझे भूखे जानवार की तरह चूमने और चाटने लगा जिस तरह से वो मुझे और एक्सरसाइज कर रहा था.आप ये कहानी हिंदी सेक्स की कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मैं समझ गयी की वो पहले भी किसी को चोद चूका है मतलब वो अनुभवी खिलाडी था ये सोचकर मैं और खुश हो गयी क्योंकि आज मैं जबरदस्त तरीके से चुदने वाली थी.फिर रवि ने कहा भाभी अब आप लेट जाओ मैं अपने लंड को तुम्हारी चूत के दर्शन करना चाहता हूँ.फिर मैं लेट गयी और फिर रवि ने मेरे पैर फैलाये और अपने भुसंड लंड को मेरी चूत पर रखा और रगड़ने लगा और मैं अपने चूत को ऊपर उठाने लगी.क्योंकि मेरी आग बढती जा रही थी तभी रवि ने अपने गांड को थोडा पीछे किया और एक जोरदार धक्का लगाया जिससे एक घच्च की आवाज आई और उसका पूरा लंड मेरी चूत में जड़ तक समा गया मैं दर्द से चिल्लाने लगी आह्ह्ह्हह्ह…. मेरी चूत.. आआअ आआअ मर्र्र्रर? गय्यीईई… आआअ… ओह्ह्ह्हह्ह…. आईईईइ…. आह्ह्हह्ह्ह्ह….
मेरी आँखों से आंसू निकल गए और मैं दर्द से कांपने लगी रवि कुछ देर ऐसे ही पड़ा रहा फिर मेरा दर्द कम हो गया, अब रवि ने मुझे चोदना शुरू किया और जोर जोर से स्ट्रोक लगाने लगा, मेरी चूत की आग को शांत करने लगा और मैं भी गांड उठा उठा कर साथ देने लगी.

करीब 20 मिनट लगातार चोदने के बाद रवि ने कहा भाभी मैं झड़ने वाला हूँ इससे पहले ही मैं झड चुकी थी, फिर मैंने कहा पूरा पानी मेरी चूत में ही दाल दो ये बहुत दिन से प्यासी है और उन्होंने पूरा पानी चूत में डाल दिया जिससे मेरी चूत पूरी भर गयी.आप ये कहानी हिंदी सेक्स की कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर हम दोनों एक दुसरे की बहो में हाथ डालकर सो गए अगले दिन मेरे सास ससुर वापस आ गए और मेरे देवर बिलासपुर चले गए लेकिन मेरे देवर मुझे हमेशा जब भी मौका मिलता है चोदते है और मैं मना नहीं करती, क्योंकि दो लंड का स्वाद मुझे भी सच्चा लगता है और मैं बहुत खुश हूँ.कभी कभी तो मैं अपने मायके जाती हूँ तो देवर के साथ ही जाती हूँ क्योंकि फिर हम किसी होटल में जाकर चुदाई करते है फिर घर जाते है इससे किसी को शक भी नहीं होता और हमें भी चुदवाने और चोदने का मजा मिलता है.कैसी लगी हम डॉनो मां देवर भाभी की सेक्स स्टोरी , शेयर करना , अगर कोई मेरी चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो अब जोड़ना Facebook.com/NishaKumari

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