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एक अविवाहित लड़की की चुदाई कहानी

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वो मेरे सीने पर उगे घने बालों मे अपना चेहरा रगड़ने लगी. “क्या कर रही हो? तुम पागल हो गयी हो क्या?” कहकर मैने उसे ज़ोर से धक्का दिया. वो ज़मीन पर गिर पड़ी. ” तुम शादी शुदा हो इस तरह का व्यवहार तुम्हे शोभा नही देता.” “हाआँ…… हाआ… ….मैं पागल हो गयी हूँ. मैं पागल हो गयी हूँ….” उसने वापस बिस्तर पर सवार होते हुए कहा ” तुमने ये घाव देखे हैं. जिस्म के अंदर का जख्म नही देखा. तुम क्या जानो बलात्कार क्या होता है. तुम मेरी जगह होते तो तुम्हे पता चलता. तुम भी यही करते जो मैं कर रही हूँ.” कहते हुए उसने मेरे सिर को अपने छातियो से सटा लिया. “देखो सूंघ कर मेरे जिस्म के हर इंच से उन हरामी आदमियों की बू आ रही है. मैं इस बदबू से पागल हो जाउन्गि. मुझे इससे बचा लो मेरे जिस्म के हर रोएँ मे अपने बदन की सुगंध भर दो. प्लीईएसस्स.. ….प्लीईससी मुझे प्यार करो. मुझे. मेरे बदन को अपने बदन से धक लो.” कहकर वो रोने लगी. मुझे समझ मे नही आया की मैं क्या करूँ. “अरे…अरे.. ..रो क्यों रही हो?” मैने उसके नग्न बदन को अपनी बाहों मे भर लिया. ” मैं टूट चुकी हूँ…..मुझे बचालो नही तो मैं कुच्छ कर बैठूँगी. वो….वो मेरा मरद होकर भी नमार्द है साला. अपनी बीवी को कुत्तों के हवाले छोड़ कर भाग गया. किस बात की शादी शुदा? थू….” मैं उसके चेहरे को अपने हाथों मे थाम कर चूमने लगा. उसके होंठों को, उसकी पलकों को, उसके कानो को, उसके गले को मेरे होंठों से नापने लगा. वो काफ़ी देर तक सुबक्ती रही मेरे हाथ पहले उसके बालों मे फिर रहे थे.. फिर उसे शांत होता देख मैं उसके स्तानो को प्यार से सहलाने लगा. वो भी मेरे होंठों को बुरी तरह चूम रही थी. दोनो ही सालों से सेक्स के भूखे थे. दोनो एक दूसरे की प्यास बुझाने की कोशिश मे लगे हुए थे. जैसे ही हम दोनो के बदन अलग हुए हम दोनो एक दूसरे के नग्न बदन को निहारने लगे. “प्लीज़… ये ट्यूबलाइज्ट बूँद कर दो. मुझे शर्म आती है.” उसने अपना चेहरा शर्म से झुका लिया. “एम्म्म…अचहचाअ …….आपको शर्म भी आती है?” ” धात….मज़ाक मत करो” मैने उठ कर ट्यूब लाइट ऑफ करके बेडलांप ऑन कर दिया. उसने मेरे उपर लेटते हुए मुझे बिस्तर पर लिटा दिया. फिर मेरी टाँगों के पास बैठ कर मेरे एक टाँग को अपने हाथों से उठाया और उसके अंगूठे को मुँह के अंदर लेकर चूसने लगी. उसके होंठ मेरे पैरों पर फिरने लगे. उफ़फ्फ़ ऐसा प्यार मैने करना तो दूर किसी पिक्चर मे भी नही देखा था. मेरे पैरों की एक एक उंगली को अपनी जीभ से गीला करने के बाद उसने मेरी एडी पर हल्के हल्के से दाँत गाड़ने शुरू कर दिए.. उसकी जीभ मेरी पिंदलियों पर से होते हुए मेरे घुटनो की ओर बढ़े. जगह जगह पर रुक कर उसके दाँत हरकत करने लगते थे. मेरे पूरे बदन मे सिहरन सी दौड़ जाती थी. मैं अपनी उंगलियाँ उसके बालों मे फिरा रहा था. उसके होंठ और जीभ घुटनो के उपर विचारने लगे. मेरा लिंग काफ़ी देर से कड़क रहने के कारण दुखने लगा था. उसे अब सिर्फ़ किसी चूत का इंतेज़ार था. उसके होंठ मेरी जांघों के उपर फिरने लगे. उसके स्तन मेरे पैरों की उंगलियों को छू रहे थे. मैं अपने पैरों की उंगलियों से उसके निपल्स को च्छू रहा था. उसने मेरे लिंग को अपनी मुट्ठी मे भर लिया. और हल्के हल्के से अपने हाथ से उसको सहलाने लगी. उसका मुँह अब मेरे लिंग की जड़ पर था.. उसने मेरे लिंग को अपने हाथों मे पकड़ कर मेरे लंड के नीचे लटकते दोनो गेंदों को जीभ से चाटना शुरू किया. बीच बीच मे वो उनको अपने मुँह मे भर लेती... कैसी लगी मेरी सेक्स कहानी , अच्छा लगी तो जरूर रेट करें और शेयर भी करे ,अगर कोई अविवाहित लड़की की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे ऐड करो Sex ki bhukhi tadapti ladki

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