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चांदनी रात में छत पर मामी की चुदाई

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वे यह बोल कर मेरे कंधे पे सर रख के रोने लगीं।मैंने उनको सांत्वना देते हुए बोला- मामी सब ठीक हो जाएगा।
मामी बोलीं- कुछ ठीक नहीं होगा.. डॉक्टर बता चुका है.. अब मुझे ऐसे ही तड़पते रहना होगा।मैं बोला- मामी भगवान पर भरोसा रखो..‘वही तो रखा है.. नहीं तो कब से कुछ क़र जाती मैं..’ ‘ओके मामी.. बताओ आपके लिए मैं क्या कर सकता हूँ?’मामी बोलीं- सैम.. पहले कसम खाओ जो बोलूँगी.. तुम वो करोगे.. ना नहीं कहोगे?
मैंने सोचा फिर कहा- ओके.. मामी अगर मेरे बस की बात होगी.. तो मैं जरूर करूँगा.. ‘नहीं सैम.. तुम करोगे कि नहीं.. यह बताओ..’मैं बोला- ओके मामी.. मैं कसम खाता हूँ कि करूँगा.. चाहे कुछ भी हो। फिर मामी थोड़ा खुश होक़र बोलीं- सैम..!‘हाँ मामी.. बोलो..?’‘सैम.. मैं तेरे साथ सेक्स करना चाहती हूँ।’ मेरा दिमाग ख़राब हो गया.. मेरे नशे के 2 पैग दारू भी बेअसर हो गई।मैं मन में सोचने लगा कि हे ऊपर वाले.. तूने नारी को किस मिट्टी से बनाया है.. इसको समझना इतना मुश्किल क्यों है?प्रत्यक्ष में मैं मामी से बोला- मामी.. आप मेरी मामी हो.. और मेरी सास होने वाली हो.. क्या ये करना सही है? मामी बोलीं- सैम.. जब तक तेरे बारे में पता नहीं था.. तब तक तो मैं सम्भली हुई थी.. आप ये कहानी हिंदी सेक्स की कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। पर अब मेरे मन में ये विचार आ गया है.. अब शायद और नहीं हो पाएगा.. और तू ‘नहीं’ बोलेगा.. तो बाद में किसी दूसरे से होगा.. जिससे यदि बाहर किसी को पता चला तो घर की बदनामी हो सकती है.. तो अब बता क्या करना है.. तूने कसम भी खाई है और तू मेरे घर का भी है.. ये बात तेरे और मेरे बीच में ही रहेगी.. किसी को पता भी नहीं चलेगा। मैं बोला- वो तो ठीक है मामी.. पर इतने सारे लोग यहाँ पर आए हे- और अगर कोई छत पर आ गया तो.. पता तो चल ही जाएगा ना..मामी बोलीं- ठीक है.. अभी तो कोई भी आ सकता है.. पर रात 12 बजे तक सब सो जायेंगे। सब थके हैं तो कोई ऊपर भी नहीं आएगा.. तब करेंगे।मैं ‘ओके..’ बोला और उधर से जाने लगा..तो मामी ने मुझे फिर से बुलाया- अपना सामान तो दिखाता जा.. सैम..मैं बोला- लो खुद निकाल कर देख लो।मामी बोली- सैम.. सरिता बोल न.. मामी अब सबके सामने बोलना।मैं ‘ओके..’ बोला। उसने मेरा लन्ड निकाल कर देखा और बोली- सैम कहाँ छुपा रखा था इतना बड़ा ‘सामान’?मैं बोला- इसको नाम लेकर बोलो सरिता रानी..

बोली- हाँ.. इतना बड़ा लण्ड कहाँ छुपा रखा था.. सैम मेरी जान..
मैं बोला- तेरे बेटी की चूत में कल रखा था सरिता रानी। वो बोली- मेरी बेटी के भाग्य खुल गए।
मैं बोला- साथ में तेरा भी भाग्य खुल गया सरिता रानी।
वो लन्ड हाथ में लेकर सहनी लगी और फिर मुँह में लेकर चूसने लगी।
कुछ देर बाद मैं नीचे जाने को बोला.. तो पहले सरिता नीचे गई.. उसके कुछ देर बाद मैं नीचे आया।
फिर मैं बस्ती के अन्दर सिगरेट पीने चला गया।
मैंने चार सिगरेट ले लिए.. फिर सिगरेट पीते हुए घर पहुँचा।
मैं पहले मंजू के कमरे में गया.. वहाँ पर दोनों बहनें थीं.. मेरे जाते ही विनी बाहर चली गई।
मैं और मन्जू रह गए.. मैंने उसके पास जाकर उसकी तबियत के बारे में पूछा.. तो मन्जू बोली- अब ठीक है।
मैं मन्जू को चुम्बन करने लगा और उसके दूध दबाने लगा.. वो भी मेरा साथ दे रही थी।दस मिनट बाद हम दोनों अलग हो गए, मैं मन्जू को गुड नाईट बोल कर आ गया, आज मेरे दिमाग सरिता की चूत चुदाई घुसी थी।रात को ठीक 12 बजे मैं छत पर गया वहाँ पर सरिता मामी पहले से बैठी थी। मैं उसके पास जाकर चारपाई पर बैठ गया। सरिता भी मुझसे सट कर बैठ गई और मेरी पैन्ट को खोलने लगी। मैं भी उसका साथ दे रहा था। मैंने सरिता को चुम्बन किया.. आप ये कहानी हिंदी सेक्स की कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। तो वो भी मेरा साथ देने लगी और जल्दी-जल्दी वो मेरा कपड़े खोलने लगी।मैं भी सरिता का कपड़े खोलने लगा। कुछ ही देर बाद हमारे जिस्मों पर कोई कपड़ा नहीं बचा था। सरिता का गोरा जिस्म चांदनी रात में चाँद की रोशनी में जैसे नहा कर चमक रहा था.. एकदम गजब की माल लग रही थी। मैंने सरिता को होंठों पर चुम्बन किया.. वो भी मेरा साथ देने लगी।हम दोनों 5 मिनट तक चूमाचाटी करते रहे। फिर मामी मेरा लण्ड लेकर चूसने लगी.. मैं भी सरिता से बोला- मुझे भी तेरी चूत का स्वाद चखना है..।यह सुनते ही उसने अपनी टांगें फैला दीं.. कुछ ही पलों बाद हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए। मैं मामीके भगनासे से खेलने लगा..मामी की चूत का स्वाद कुछ अजीब था। शायद चुदी हुई चूत थी.. इसलिए कुछ अलग स्वाद था।कुछ देर बाद वो अपने दोनों पैर को अकड़ाने लगी.. मानो मेरे सर को अपनी चूत में घुसाना चाहती थी मुझे ऐसा लगा। करीब 5 मिनट में ही उसका माल निकल गया, फिर वो थोड़ा रुक गई। मैंने बोला- अभी मेरा नहीं हुआ है..तो सरिता बोली- सैम अपने लण्ड को मेरे छेद में डाल..मैं बोला- साली कुतिया.. पहले चूस के माल निकाल.. फिर डालूँगा..‘ओके..’ वो गपागप लॉलीपॉप की तरह लौड़ा चूसने लगी.. और साथ ही वो मेरे गोटों से खेल रही थी.. मुझे बड़ा मजा आ रहा था।

दस मिनट बाद मेरा निकलने वाला था- ‘आह्ह.. सरिता मेरी जान जल्दी..’वो जल्दी-जल्दी चूसने लगी। फिर मेरा माल निकल गया.. वो पूरा रस मुँह में ले कर पी गई और लौड़ा चाट कर साफ कर दिया।कुछ देर तक हम दोनों चारपाई में लेटे रहे और एक-दूसरे के बदन से खेलने लगे। कुछ ही मिनट बाद मेरा फिर खड़ा हो गया और सरिता भी चुदने को बेताब हो रही थी। उसकी दोनों टाँगों को ऊपर करके मैं टाँगों के बीच में आ गया और चूत में लण्ड को लगा कर डालने लगा। चुदी हुई चूत थी.. इसलिए आसानी से अन्दर घुस गया.. पर बहुत दिनों से चुदाई नहीं हो रही थी.. इसलिए थोड़ा टाइट जा रहा था। अभी 2 इंच लण्ड अन्दर गया था कि मैंने जोर से एक झटका लगा दिया.. जिसके कारण लण्ड 6 इंच अन्दर चला गया और सरिता के मुँह से चीख़ निकल गई- सैम मर गईईईई.. आराम से.. कर..!मैं बोला- साली हरामिन.. जब लण्ड लेने के लिए तेरा चैन उड़ गया है.. तो ले न मेरा मूसल.. ऐसा बोल कर मैंने एक और झटका लगा दिया। आप ये कहानी हिंदी सेक्स की कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। सरिता को गाली देते हुए उसकी चूत की चुदाई करता रहा।लगभग 10 मिनट बाद वो झड़ गई। मैं बोला- कुतिया.. साली भैन की लौड़ी.. ले मेरा लण्ड ले.. तेरे होने वाले दामाद का लण्ड ले.. कुतिया मेरी सासू जान.. मन्जू का लण्ड ले.. भोसड़ी वाली.. तेरे को चैन नहीं आ रहा था न.. बगैर लण्ड के.. तो ले रंडी.. ले.. सरिता भी जोश में आ गई- चोद माँ के लौड़े.. अपनी होने वाली सास को चोद.. फाड़ दे.. इस चूत को.. बहुत तड़पाती है.. जोर से चोद.. फाड़ दे मेरे बड़े लण्ड वाले दामाद.. तेरे लण्ड से मेरी चूत को दण्ड दे.. सैम.. डेढ़ साल से प्यासी है मेरी चूत.. चोद इसे.. आह्ह.. मजा आ गया..कुछ देर के बाद मैं सरिता को डॉगी स्टाइल में आने को बोला और पीछे से उसकी चूत मारने लगा।‘सरिता.. तेरी बेटी चोदूँ हरामिन.. तू तो बड़ी सेक्सी है रे.. मैं तो धन्य हो गया.. तेरी जैसी सास को पाकर.. ले मेरी जान..आह्ह..’‘हाँ.. मैंने भी कोई पुण्य किया था.. जो तेरे जैसा लण्डधारी दामाद मिला मुझे.. सैम.. चोद सैम.. फाड़ दे इस चूत को!’‘हाँ.. मेरी सरिता रण्डी.. साली कुतिया.. ये ले.. ले..’‘सैम.. जोर से कर.. आह्ह.. मैं बस आ रही हूँ.. आह्ह.. मैं.. और जोर से जान..’‘मेरा भी होने वाला है सरिता.. किधर चोद दूँ मलाई?’ ‘चूत में डाल दे.. बहुत दिनों से सूखी है.. भर दे तेरे माल से..’

मैंने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और मैं सरिता की चूत में ही झड़ गया.. पूरा माल सरिता के चुदे छेद में डाल दिया।
इस एक घंटे की धकापेल चुदाई में सरिता 5 बार झड़ी थी और मैं 2 बार झड़ा था।उसके बाद मैंने कुछ देर आराम किया फिर उसके चूतड़ों में दो चपत लगाईं.. सरिता को चुम्बन किया और नीचे आया।सरिता मुझे ‘थैंक यू..’ बोली और मुझसे गले लग कर रोई.. मैं उसे समझा बुझा कर नीचे लाया।सब सोये हुए थे.. हम लोग भी सोने के लिए लेट गए। आप लोगों को कैसी लगी मेरी यह सच्ची कहानी.. प्लीज़ दोस्तों मुझे ईमेल कीजिएगा और जरूर बताईएगा।कैसी लगी मामी की चुदाई स्टोरी , रिप्लाइ जररूर करना , अगर कोई मेरी मामी की तड़पती प्यासी चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे अब जोड़ना Facebook.com/SaaritaSharma

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अन्तर्वासना हिंदी चुदाई की कहानियाँ

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